Duniya Ki Rahasyamayi Unsuljhi Baate | दुनिया की रहस्यमई अनसुलझी बातें
Duniya Ki Rahasyamayi Unsuljhi Baate(दुनिया की रहस्यमई अनसुलझी बातें )
ये दुनियाँ अनेक रहस्यों से भरी है कुछ ऐसे रहस्य जिसके पीछे का कारण अभी तक कोई नहीं जान सका है। यदि जान भी लिया है तब भी उसका सटीक जानकारी कोई भी नहीं दे सका है आज हम आपको ऐसी ही कुछ इस दुनिया की रहस्यमई अनसुलझी बातें बताएँगे जिनको सुनकर आप भी हैरान रह जायेंगे एक बार जरूर पढ़े और यदि जानकारी अच्छी लगे तो शेयर करें। चलो आइए जानते हैं।
हम आपको भारत के कुछ ऐसे गॉंव के रहस्यों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में शयद ही आपने सुना होगा मलाड़ा हिमांचल का एथेंस हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बसा है मलाड़ा गॉंव ये गॉंव अपने आप में काफी रहस्यमई एवं दिलचस्प है सबसे पहले आपको यहाँ पर कुछ भी छूने की इज्जाजत नहीं है ।
जी हाँ सही सूना आपने आप यहाँ कुछ भी छू नहीं सकते अब इसके पीछे की वजह भी जान लीजिये दरसल मलाड़ा निवासी अपने आपको सर्वश्रेस्ट मानते हैं ऐसे में किसी भी वहारी इंसान ने उनके मंदिर घर यहाँ तक की दुकानों तक को छू लिया तो बे उस पर एक हज़ार से दो हज़ार तक का जुरमाना लगा देते हैं।
यहाँ के निवासी भारत संविधान नहीं मानते इनके अपने सदन हैं और उसके अपने नियम कानून हैं जिसका वो बड़ी शक्ति से पालन करते है इनका मानना है की नियम तोड़ने से हमारे देवता नाराज हो जाते हैं जिसे पूरा गॉंव तबहा हो जायेगा। गॉंव वाले जमलू ऋषि की पूजा करते हैं इस गॉंव के इतिहास के मुताबिक जमलू ऋषि ने ही इस गॉंव के नियम कानून बनाये थे। इस गॉंव का लोकतंत्र दुनिया का सबसे प्राचीन लोकतंत्र में से एक है। ऐसा मन जाता है जमलू ऋषि को आर्यों से भी पहले पूजा जा रहा है उनका उल्लेख पुराणों में भी आता है।
यहाँ के लोग खुद को आर्यों का वंसज मानते हैं। एक और परंपरा के अनुसार वे खुद को सिकंदर का वंसज मानते हैं। गॉंव वालों के अनुसार जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया तो उसके कुछ सैनिकों ने सेना छोड़ दी और यहाँ आकर बस गए। साल में एक बार यहाँ फागली उत्सव मनाया जाता है जिसमें ये लोग यहाँ मुगल सम्राट अकबर की पूजा करते हैं। यहाँ पर आने वाले टूरिस्टो को गॉंव में आने की मनायी है।
वो लोग गॉंव के बाहर ही टेंट में रह सकते हैं। यहाँ की भाषा भी कुछ अलग है। यहाँ पर संस्कृत एवं तिब्बत की कई बोलियों का मिश्रण मिलेगा जो आस पास के किसी भी भाषा से मेल नहीं खाती।
आइये अब कुछ और दुनिया की रहस्यमई अनसुलझी बातें जानते हैं।
टिल्टेपक जहाँ इंसान से लेकर पशु पक्षी तक सब अंधे हैं। भारत में एक गॉंव है टिल्टेपक जहाँ जोपोटेक नाम की जन जाती रहती है। इस जन जाती के सभी लोग अंधे हैं। इतना ही नहीं यहाँ के जानवर से लेकर पक्षी तक सबकी आँखों की रोशनी ख़त्म हो चुकी है। दरअसल यहाँ पैदा होते वक्त तो सभी बच्चे सही सलामत और स्वस्थ होते हैं।
मगर कुछ दिन बात ही वो द्रष्टि हीन हो जाते हैं। यहाँ के निवासी अपने इस अंधेपन के पीछे की वजह एक श्रापित पेड़ को मानते हैं। उनके मुताबिक लाफ जुएजा नाम के पेड़ को देखने के बाद इंसान से लेकर जानवर तक सब अंधे हो जाते हैं।
हालाकि वैज्ञानिको ने इस कारण को नकारते हुए बताया की यहाँ के अंधेपन की वजह एक ख़ास किस्म की काली मक्खी है जो काफी जहरीली होती है। और इसके काटने पर इसका जहर सरीर में फ़ैल जाता है जिसका सबसे पहला असर आँखों की नसों पर होता है।
जिससे जानवर हों या इंसान वो जल्द ही अंधे हो जातें हैं। इस गॉंव की एक और ख़ास बात है यहाँ किसी भी घर में खिड़कियाँ नहीं हैं। इस गॉंव में तकरीबन सत्तर झोपड़ियाँ हैं, जहाँ करीब तीन सो लोग रहते हैं। लेकिन किसी भी घर में कोई खिड़की नहीं है। इसके पीछे की वजह भी इनका अंधापन है।
आँखों की रौशनी चले जाने के बाद इन्हे सूरज की रौशनी से कोई फर्क नहीं पड़ता जिस कारण यहाँ की किसी झोपड़ी में कोई खिड़की नहीं है।
मत्तूर इस गॉंव में हिन्दू -मुस्लिम सब संस्कृत बोलते हैं। कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु से करीब ३०० किलोमीटर दूर बसा है मत्तूर गॉंव इस गॉंव की खासियत ये है ।
यहाँ निवासी आम बोलचाल की भाषा में कन्नड़ नहीं संस्कृत की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यहाँ बच्चों से लेकर बुजर्ग तक और हिन्दुओ से लेकर मुस्लिमों तक सभी आपस में संस्कृत भाषा में ही बात करते हैं।
दस साल की उम्र से ही बच्चों को वेदों के ज्ञान दे दिए जाते हैं। यहाँ के गॉंव वाले बताते हैं की करीब ६०० साल पहले केरल के संकेथी ब्राह्मण समुदाय के लोग यहाँ आकर बस गए थे। तब से यहाँ संस्कृति ही बोली जानी लगी। हलाकि बाद में यहाँ कन्नड़ भाषा बोलने लगे थे लेकिन ३५ -४० साल पहले पेजावर मठ के स्वामी ने इसे संस्कृत भाषी गॉंव बनाने के आह्वान किया।
जिसके बाद मात्र १० दिनों तक रोज २ घंटे के अभ्यास से पूरा गॉंव संस्कृत में बात करने लगा। मत्तूर गॉंव में ५०० से ज्यादा परिवार रहते हैं। जिसके संख्या तक़रीबन ३५०० के आसपास है।
कोडिन्ही ये है जुड़वाँ लोगों का गॉंव आमतौर पर किसी के परिवार में एक या दो जुड़वाँ बच्चे होंगे किसी किसी परिवार में तो एक भी नहीं होता लेकिन केरल का एक ऐसा गॉंव है जिसके हर परिवार में २ से ३ जुड़वाँ बच्चे हैं।
यकीन नहीं होता लेकिन ये सच है। यदि वैश्विक इस्तर पर देखें हर १००० बच्चों पर ४ जुड़वाँ होते हैं। ऐसिया में ये दर तो ४ से भी कम है लेकिन केरल कोडिन्ही गॉंव में हर १००० बच्चों पर ४५ बच्चे जुड़वाँ पैदा होते हैं। इस मुस्लिम बहुल्य क्षेत्र की कुल आबादी २००० है इस गॉंव में घर स्कूल बाजार हर जगह हमसक्ल नज़र आते हैं।
ऐसा बतया जाता है की इस गॉंव में जुड़वाँ जोड़े में सबसे उम्रदरार ६५ साल के अब्दुल हमीद और उनकी जुड़वाँ बहन कुन्हीदही हैं। ऐसा मन जाताहै इस गॉंव तभी से से जुड़वाँ बच्चे पैदा होना शुरू हो गए थे शुरू में तो सालों में तो कोई एक्का दुक्का जुड़वाँ बच्चा पैदा होते थे, लेकिन बाद में इसमें तेजी आयी और अब तक ही तेज रफ़्तार से जुड़वाँ बच्चा पैदा हो रहे हैं।
आइये आप को कुछ और रहस्यों के बारे में बताते हैं। आज हम आपको भारत के एक ऐसे स्थान के बारे में बताने वाले हैं जिसे तंत्र मंत्र से लेकर विज्ञान तक नहीं सुलझा पाया है। किसी को भी यह नहीं पता है की उस रहस्य के पीछे की असली वजह क्या है। केरल में स्तिथ पदमनाथ स्वामी मंदिर रहस्यों का भंडार है सम्पूर्ण विश्व में इसके रहस्यों की चर्चा है देखने में ये मंदिर अत्यंत भव्य और विशाल लगता है।
इसके अलावा और भी अनेक रहस्य इसके गर्व में समहित हैं। ये मंदिर आस्था का प्रतीक तो है ही साथ ही अपार धन संपदा के कारण ये पूरे विश्व के सामने आकृषण का केंद्र बना हुआ है। अगर ग्रंथों की माने तो ५००० वर्ष पहले जब मानव जाति ने कलयुग में अपना पहला कदम रखा था तो ग्रंथो के अनुसार उस समय भी ये मंदिर वहाँ उपस्थित था। लेकिन बाद में १८ वी शताब्दी के आस पास त्रावण पुर के राजाओं ने इस मंदिर की आकृति को पुनः निर्माण किया उसके ढांचे को एक नया रूप दिया। उसका अर्थ ये आज आप जिस मंदिर के ढांचे को देखते हैं।
वो १८ वी शताब्दी में त्रावण पुर के राजाओं द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर के इतिहास में एक पूर्व रोचक किस्सा भी शामिल है, और वो ये देश की आजादी के बाद जब सभी मंदिर सरकार के कब्जे में आ रहे थे तो स्वामी पदमनाथ मंदिर को अपने कब्जे में न लेकर राजा मार्तण्डया वर्मा और उनके परिवार वालों को ही इसकी देख रेख की जिम्मेदारी दे दी। और आज के वर्तमान समय में भी यही शाही परिवार एक ट्रस्ट बनाकर उस मंदिर की पूरी व्यवस्था को देख रहा है।
जैसे की मंदिर के नाम से ही पता चलता है की ये मंदिर भगवान विष्णु का है। और इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है की त्रावण पुर के महाराजा ने यहाँ बहुमूल्य हिरे जवारात छिपा कर रखे हैं ताकि कभी राज्य पर कभी कोई संकट आये तो उस बुरे समय में ये धन काम में आ जाये।
महाराजा का ये सख्त आदेश था की जिस जगह ये धन रखा हुआ है उन दरवाजों को कोई खोल नहीं खोलेगा। राजा के इस सख्त आदेश के बाद किसकी हिम्मत थी की उन दरवाजों को खोलकर राजा के प्रकोप का सामना करता। इसलिए किसी ने भी ऐसी कोशिस नहीं की।
राजा ने मंदिर के अंदर सात गुप्त तयखाने बनवाये थे सभी के साथ जुड़ा हुआ था एक रहस्यमई दरवाजा इन दरबाजों को आसानी से खोल नहीं सकता था , और यही से सुरु होती है रहस्यों की असली गाथा। हज़ारों साल पहले मंदिर के जो सात दरवाजे बंद पड़े हैं उन्हें सन २०११ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार द्वारा खुलबाने का फरमान जारी किया गया।
इस आदेश के बाद किसी तरह से मंदिर में उपास्थि उन ६ दरबाजों को खोल दिया गया और उनके खुलते ही मानो संसार में एक नई सनसनी फैल गयी, क्योकी पहले लोग अनुमान लगा रहे थे तयखानों के पीछे हज़ार से दो हज़ार करोड़ तक का खजाना होगा।
लेकिन ये सारे अनुमान धरे के धरे रह गए क़्योंकि उन तयखानो के पीछे मिले खजाने की कुल कीमत १ लाख करोड़ से भी ज्यादा आकि गयी। ६ दरबाजों के पीछे मिले इस खजाने के पीछे एक से बड़कर महंगे हिरे और कई और हज़ारों किलो का सोने का अम्बार लगा हुआ था। इसके आलावा इस खजाने में ऐसा कोई बेशक़ीमती धातु नहीं होगा जो समलित न हो। जैसे ही यह तथ्य दुनिया के सामने आया तो मानो सम्पूर्ण विश्व में खलबली मच गयी।
Duniya Ki Rahasyamayi Unsuljhi Baate:-
आइये कुछ और रहस्यों के बारे में आपको बताते हैं, ६ इंच का नर कंकाल कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने महज ६ इंच के एक कंकाल को खोज लिया था यह काफी हैरान करने वाली घटना है इतना छोटा कंकाल कैसे हो सकता है लेकिन यह हकीकत हकीकत है यह अभी तक रहस्य बना था की आखिर इतना छोटा कंकाल किसका ?क्या ये किसी इंसान का है या फिर किसी एलियन ? जब इस कंकाल की खोज हुई यही अंदाजे लगाए थे की यह किसी एलियन का हो सकता है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस गुत्थी को सुलझा लिया है अब यह राज खुल चुका है जिससे कई सवालों के जबाव मिल सकते हैं।
दरअसल इस को साल २०२३ में चिली के अटाकामा रेगिस्तान में खोजा गया था इस इस कंकाल को ट्रेजर हंटर ऑस्कर मुनो ने था इस कंकाल को देखकर वैज्ञानिक काफी हैरान हो क्योंकि बनावट बहुत ही अजीबोगरीब थी कंकाल की बड़ी खोपड़ी और शरीर देखकर वैज्ञानिकों ने इसे एलियन से भी जोड़कर देखा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जहाँ आम इंसान के ढाँचे में १२ रिब्स पाए जाते हैं वहीं इस कंकाल में १० ही रिब्स पाए गए इस कारण वैज्ञानिकों को काफी असमंजस का सामना करना पड़ा उन्हें यह तय करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा कि यह कंकाल इंसान का है या किसी एलियन का साल २०२३ में एक यूएफओ डॉक्यूमेंट्री भी आयी थी जिसमें इस कंकाल जिसमें इस कंकाल के एलियन होने सिद्धांत पेश किया गया था हलांकि खोज कर्ताओं ने इस राज का खुलासा कर दिया है की यह कंकाल किसी एलियन का नहीं बल्कि एक इंसानी भ्रूण का है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कैलफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए जाँच के दौरान यह पाया गया की बच्चे की मौत ४० साल पहले हुई थी जिसका भ्रूण बाद में मिला था इस भ्रूण ने कई सवाल भी खड़े कर दिए थे वैज्ञानिकों के अनुसार कंकाल के बड़े सिर और १० रिब की वजह अनुवांशिक हो सकती है जिसके कारण भ्रूण की हड्डियों का विकास सही से नहीं हो पाया उनका यह भी कहना है कि हो सकता है कि बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ हो। हलाकि आज भी कई लोग इसे किसी बच्चे का भ्रूण मानने से इंकार करते हैं ऐसे लोग मानते हैं इसके रहस्य की गुत्थी आज भी अनसुलझी है।
आपका क्या कहना है एक बार कमेंट बॉक्स में जरूर बताए।



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